Thursday, March 3, 2011







देखिये तो लगता है,
ज़िन्दगी की राहों में,
एक भीड़ चलती है,
सोचिये तो लगता है,
भीड़ में हैं सब तन्हाँ,

जितने भी यह रिश्ते हैं,

काँच के खिलोने हैं,
पल में टूट सकते हैं,
एक पल में हो जाये,

  कोई जाने कब तन्हा!

देखिये तो लगता है,

जैसे यह जो दुनियाँ है,
कितनी रँगी महफ़िल है,
सोचिये तो लगता  है,
कितना ग़म है दुनियाँ में,
कितना ज़ख़्मी हर दिल है !


वो जो मुस्कुरातें थे, 
जो किसी को ख्वाबों में ,
अपने पास पाते थे ,
उनकी नींद टूटी है ,
और हैं वो अब तन्हाँ!


देखिये तो लगता है,
ज़िन्दगी की राहों में,
एक भीड़ चलती है,
सोचिये तो लगता है,
भीड़ में हैं सब तन्हाँ!
 

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