Tuesday, January 12, 2010

जो बीत गई सो बात गई

जो बीत गई सो बात गई
जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है

जो बीत गई सो बात गई
जीवन में वह था एक कुसुम
थे उसपर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुवन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियाँ
मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ
जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है

जो बीत गई सो बात गई
जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठतें हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है

जो बीत गई सो बात गई
मृदु मिटटी के हैं बने हुए
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन लेकर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फिर भी मदिरालय के अन्दर
मधु के घट हैं मधु प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है

जो बीत गई सो बात गई।।


~ हरिवंश राय बच्चन

13 comments:

Mulling Over My Thoughts said...

:)

Gaurav Kant Goel said...

One of the nicesest poem I had ever read when i was in class-9. Thanks for reminding it again!!!

Aevi said...

..one of my favorite poets after Ramdhari jee Singh Dinkar

have ever heard the version of madhushala that manna de sang way back? I had a cassette dunno if the cds are available for it

Pallav said...

Sneha..
outstanding..
written so beautifully
1 - 1 words has its won importance

now u can use me in summers... because i m ur Pankha ...i mean fan.....
hehehehe... :P

Sneha said...

pallav y bachchan jee ki poem hai.

meri nahi.:(

Sneha said...

@ Abhinav,
I have heard it multiple times back home on the LP Records. And i am sure there is a CD for that.:)

Sneha said...

@ Gaurav,
You bet.:)

Sneha said...

@ Bikram,
Whenever i read this poem it seems to purge out my worries and shows you an entirely different perspective.:)

Pallav said...

ohh shit...
i dint read tht...
sorry...

extremely sorry...

Pallav said...

Last me tha na naam..isliye..Sorry...

Sneha said...

Oey Koi nai.

Hota hai
chalta hai
duniyah hai.:)

Mulling Over My Thoughts said...

:)
I know...there's something about that poem that appeals to a completely different side of you.
Some people seem to have that ability...they write so beautifully, they manage to carry you to the same emotion they are experiencing.

Sneha said...

@ Bikram,

He has a simple and straight way of getting to the point unlike many others who take a round about and circumvented way to express.
I love reading him.:)